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Sunday, July 14, 2019

3d प्रिंटिंग क्या है? ओर केसे काम करती हैं।

3d प्रिंटिंग क्या है और केसे काम करती हैं।
हेल्लो दोस्तों स्वागत है आपका एक बार फिर से new business ideas में, आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि 3 डी प्रिंटिंग क्या होती है और यह किस प्रकार से काम करती हैं। 

3 डी प्रिंटिंग को जानने से पहले हमें ये जानना बहुत जरूरी है कि 3डी क्या होता है। वैसे तो काफी लोगो को पता होगा या पहले से ही जानते होंगे कि 3डी का मतलब 3 dimensional होता है। 
3डी प्रिंटिंग में किसी भी वस्तु का समेs to same दूसरी कॉपी बन जाती हैं। 
आप सभी ने 2 डी dimension के बारे में तो सुना होगा जिसका मतलब होता है जिसको आप दो तरफ से ही देख सकते हो। इसी प्रकार 3डी इमेज होती है। 3 dimension के का होता है इसे आप तीन तरफ से भी देख सकते हैं। इसकी गहराई को भी देख सकते हैं। खास बात यह कि इसे देखने पर यह वास्तु बिल्कुल वास्तविक लगती है।
अब तो 3 डी गेम और फिल्म भी आने लगी है जैसे वो बिल्कुल आपके सामने वास्तव में ही हो । 3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी से आप किसी बी वस्तु को कॉपी कर सकते हो। 
3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी वास्तव मैं एक लाजवाब तोहफा है विज्ञान का जिसके तो मार्केट 
का नक्शा ही बदल दिया है। अगर आप भी 3डी प्रिंटिंग में पूरी जानकारी चाहते हो तो यह आर्टिकल अंत तक जरूर पड़े। ताकि आपको प्रोपर जानकारी मिले। आज के समय में नई नई technology बड़ती जा रही है। चलिए शुरू करते हैं।







































#3डी प्रिंटिंग क्या होती है ?

3डी प्रिंटिंग एक ऐसी प्रोसेस है, जिसमें एक डिजिटल फाइल से तीन dimension solid object ko बना या जाता है। 
3डी प्रिंटिंग वस्तु को बनाने का के लिए additive process का इस्तेमाल किया जाता है। इस additive process में एक वस्तु को बनाने के लिए मटेरियल को sucessive लेयर्स में एक के ऊपर एक रखा जाता है। जब की वो वस्तु बन ना जाए। इसमें every परत को आप देख सकते हैं। एक थिंकली sliced horizontal cross section के तौर पर उस एक्सटर्नल वस्तु का जो कि आखिर में आप बनाना चाहते हैं।
3डी प्रिंटिंग पूरी तरह से opposite होता है। एक वस्तु को धीरे धीरे छोटे छोटे टुकड़ों में कट किया जाता है। एक milling machine ke इस्तेमाल से। 
3डी प्रिंटिंग आपको enable करते बहुत ही कॉम्प्लेक्स शेप को तयार करने में जो की ट्रेडिशनल मैनुफैक्चरिंग विधि से कर पाना बहुत ही मुश्किल है। वही इसके लिय बहुत ही कम चीज़ों कि जरूरत होती है। 
इसको 3डी प्रिंटिंग कहते हैं। 

# 3 डी प्रिंटिंग प्रकार।

3 डी प्रिंटिंग करने के लिए बहुत से तरीके होते हैं। ये सभी टेक्नोलॉजी additive hote hai,
 ये differ भी करते हैं। तो मुख्य उन तरीकों से की केसे परत को बिल्ड किया जाता है। एक ऑब्जेक्ट को बनाने के लिए कुछ तरीके में metting ओर differing मटेरियल का उपयोग किया जाता हैं। लयर को extrade करने के लिए वही दूसरी photoreative resin ko cure करने के लिए एक laser ka उपयोग किया जाता है। 
इस को ज्यादा precise करने के लिए 2010 में अमेरिकन सोशियाटी ने aaditive मैनुफैक्चरिंग में विकास किया है। 
एक सेट ऑफ स्टैंडर्ड जो कि classify करते हैं। Additing मैनुफैक्चरिंग को सात कैटेगरीज में बात गया है। 

#1 vat photopolymerisation

A. Stereolithography
B. Digital light processing
C. Contnous liquid interface production

#2 material jetting
#3 blinder jetting
#4 material extraction 
A. Fused deposition modeling
B. Fused filament fabrication

#5 powder bed fusion

A. Selective laser sintering
B. Direct metal laser sintering

#6 sheet lamination
#7 directed energy deposition

3 d printing केसे काम करती हैं।

सबसे पहले वस्तु का वर्चुअल डिजाइन बनाया जाता है। यह डिजाइन 3डी प्रिंटिंग को पड़ने के लिए blueprinti ng ki तरह काम करता है।
वर्चुअल डिजाइन कंप्यूटर added डिजाइन सोफ्टवेयर का उपयोग किया जाता है। यह एक प्रकार का सोफ्टवेयर होता है। जो dring इमेज ओर तकनीकी इमेजेस बना सकता है। एक 3डी स्कैनर का उपयोग करके वर्चुअल डिजाइन भी बनाया जा सकता है। जो मूल रूप से विभिन्न कोणों से तस्वीर के कर मौजूदा वस्तु की एक प्रति बनाता है। 
वर्चुअल मॉडल बनने के बाद इसे प्रिंटिंग के लिए तैयार किया जाता है। स्लिंग्सिंग नामक प्रक्रिया का उपयोग करके मॉडल को कई परतों में तोड़कर किया जाता है। ओर इसे विशेष सोफ्टवेयर ला उपयोग करके सैकड़ों या हजारों पतली श्यतीज पर्तो में स्लाइस करती हैं। मॉडल को स्लाइस करने के बाद स्लाइस 3डी प्रिंटिंग पर अपलोड करने के लिए तैयार होती हैं। 3डी प्रिंटिंग पर कंप्यूटर से करा हुआ मॉडल को स्थनतरित करने के लिए यूएसबी केबल या वाई फाई कनेक्शन का उपयोग करके किया जाता है। तो यह मॉडल के प्रत्येक टुकड़े को जाती है। ओर परत द्वारा परत को प्रिंट करती हैं। इसके बाद 3डी प्रिंटर प्लास्टिक या बताए गए किसी दूसरे मटेरियल का उपयोग करके उस वस्तु का बिल्कुल हूबहू मॉडल तयार कर देता है। 

3 d प्रिंटिंग का उपयोग कहां कहां किया जाता हैं।

3डी प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी अब तो काफी आगे बढ़ चुकी है। अब तो इसके माध्यम से इंसान के शरीर के अंगों को बनाने 3डी प्रिंटिंग के माध्यम से बनाए जा रहे हैं। 
जैसे- ear, teeth, bone etc 
जैसे पहले लोग अपने मोम के पुतले बनवाया करते थे, जो पत्थर के होते थे जिनको बनाने में बहुत ही ज्यादा समय लगता था। जिससे पता लगाया जा सकता था कि हम जवानी में केसे दिखते थे। लेकिन आज के समय में लोग अपने आप को 3 डी प्रिंटर के माध्यम से स्कैन करा कर अपने ही पुतले same to same  कुछ ही समय में अपने पुतले बना लेते हैं।
जापान और दुबई में तो यह टेक्नोलॉजी काफी आगे निकल चुकी है। वहा के एक इंजीनियर ने 3 प्रिंटिंग के माध्यम से पूरा घर ही तयार कर डाला सिर्फ तीन चार दिनों में। ओर दुबई में थोड़े से समय में दस मंजिल बिल्डिंग तयार कर डी है 3डी प्रिंटिंग के माध्यम से। 

# 3 d प्रिंटिंग में कोनसा सोफ्टवेयर यूज किया जाता है।

3डी मॉडल की फाइल एक सोफ्टवेयर में बनाई जाती हैं। जिसका नाम है, blender जिसकी फाइल amf फॉर्मेट होती हैं।
अगर आपको कंप्यूटर में amf की कोई फाइल दिखती है तो समझ जैयागा की यह 3डी प्रिंट की फाइल है।
Amf का मतलब होता है, additing मैनुफैक्चरिंग फाइल।
दोस्तो आज के समय में 3डी प्रिंटिंग का चलन बहुत तेजी से चल रहा है। 3डी प्रिंटिंग के माध्यम से कोई buildinग या प्रतिमा आदि को कुछ ही समय में बनाया जा सकता है। 
आप को यह जानकारी कैसी लगी है प्लीज़ कमेंट जरूर करें।
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धन्यवाद।

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